विज्ञान –> 02. संसारमें चार जाति (अण्डज-जरायुज-स्वेदज और उद्भिज्ज) के जीव हैं; काशीमें मरने से सभी परमपदको प्राप्त करते हैं ॥
संतत जपत संभु अबिनासी । सिव भगवान ग्यान गुन रासी ॥ आकर चारि जीव जग अहहीं। कासीं मरत परम पद लहहीं॥ २ ॥ हे प्रभो ! संतलोग ऐसी नीति कहते हैं और वेद, पुराण तथा मुनिजन भी यही बतलाते हैं कि गुरुके साथ छिपाव करनेसे हृदयमें निर्मल ज्ञान नहीं होता ॥ ४५ ॥ यही सोचकर मैं अपना अज्ञान प्रकट करता हूँ। हे नाथ ! सेवकपर कृपा करके इस अज्ञानका नाश कीजिये। संतों, पुराणों और उपनिषदोंने रामनामके असीम प्रभावका गान किया है ॥ १॥ कल्याणस्वरूप, ज्ञान और गुणोंकी राशि, अविनाशी भगवान् शम्भु निरन्तर रामनामका जप करते रहते हैं। संसारमें चार जाति (अण्डज, जरायुज, स्वेदज और उद्भिज्ज) के जीव हैं, काशीमें मरनेसे सभी परमपदको प्राप्त करते हैं ॥ २ ॥ { यहाँ “चार जातियाँ” सामाजिक वर्ण (ब्राह्मण-क्षत्रिय आदि) नहीं हैं, बल्कि जीवों की उत्पत्ति के चार प्रकार हैं, जिन्हें शास्त्रों में चतुर्विध योनियाँ कहा गया है। संसार की चार जातियाँ (चतुर्विध योनियाँ) शास्त्रों (गरुड़ पुराण, भागवत, मनुस्मृति) के अनुसार संसार में सभी जीव चार प्रकार से उत्पन्न होते हैं—अण्डज, जरायुज, स्वेदज और उद्भिज्ज 1️⃣ अण...